संसद के बजट सत्र में मंगलवार, 4 फरवरी 2026 को उस समय भारी तनाव देखा गया जब विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा। इस शोर-शराबे का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी निर्धारित प्रतिक्रिया देने के लिए शाम 5:00 बजे सदन में नहीं आ सके।
असल में यह पूरा मामला सुबह से ही बिगड़ता चला गया था। सदन में माहौल इतना गरम था कि ओम बिरला, लोकसभा अध्यक्ष
को पहले दोपहर 12:00 बजे, फिर 2:00 बजे और अंत में शाम 5:00 बजे सदन स्थगित करना पड़ा। यह लगातार तीसरा दिन था जब धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हंगामे की भेंट चढ़ गई।turns out, यह केवल एक दिन का तनाव नहीं था, बल्कि संसदीय गतिरोध की एक लंबी कहानी बन चुका था।सदन के बाहर की हलचल और बंद कमरों की बैठकें
जब सदन स्थगित हुआ, तब असली राजनीति पर्दे के पीछे शुरू हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पीकर ओम बिरला के कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात के दौरान उनके साथ अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
और किरण रिजिजू जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे। दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक में केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि के.सी. वेणुगोपाल और शैलजा कुमारी जैसे कांग्रेस सांसद और चिराग पासवान भी शामिल थे।सूत्रों की मानें तो स्पीकर ऑफिस के अंदर का माहौल काफी तल्ख था। विपक्षी सांसदों का लहजा काफी सख्त था। दरअसल, स्पीकर ने विपक्ष से शाम 4:00 बजे तक अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, लेकिन बातचीत में कोई सहमति नहीं बन पाई। इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह ने अलग से स्पीकर से मुलाकात की, जिसमें भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को भी बुलाया गया था। बाद में शाह ने पीएम मोदी को पूरी स्थिति से अवगत कराया। (यह सब देखकर लग रहा था कि सरकार किसी तरह बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही थी, पर विपक्ष झुकने को तैयार नहीं था।)
विवाद की जड़: नेहरू-गांधी बयान और राष्ट्रीय सुरक्षा
अब सवाल यह है कि आखिर हंगामा शुरू क्यों हुआ? चिंगारी तब लगी जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बारे में कुछ विवादास्पद टिप्पणियां कीं। विपक्ष ने इसे अपने नेताओं का अपमान माना और सदन में भारी विरोध शुरू कर दिया।
लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं थी। विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप यह था कि राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर बोलने से रोका जा रहा है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा, "हम भाजपा जैसे नहीं हैं। जब राहुल गांधी देश की असली सच्चाई बताना चाहते हैं, तो वे डर जाते हैं और इसीलिए उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।" राहुल गांधी ने खुद भी स्पीकर को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील और 'किताब बनाम किताब' की जंग
इस राजनीतिक घमासान के बीच एक और गंभीर मुद्दा था—भारत-अमेरिका व्यापार समझौता। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर एक स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) पेश किया था। उनका तर्क था कि व्यापार, ऊर्जा और विदेश नीति से जुड़े फैसले बिना किसी पारदर्शिता के लिए जा रहे हैं और सरकार को इस पर तुरंत जवाब देना चाहिए।
सदन के बाहर के वीडियो में देखा गया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच 'किताब बनाम किताब' की बहस छिड़ी हुई थी, जहाँ दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेजों और प्रमाणों के जरिए एक-दूसरे को गलत साबित करने की कोशिश कर रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस स्तर का गतिरोध करीब 22 साल बाद देखा गया है। जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो संध्या राय presiding officer की कुर्सी पर थीं, लेकिन तब तक माहौल पूरी तरह खराब हो चुका था। तेजस्वी सूर्या जैसे भाजपा सांसदों ने कांग्रेस पर संदर्भ से बाहर बात करने का आरोप लगाया।
महिलाओं के आरक्षण पर पीएम मोदी का पलटवार
दिन भर के इस तनाव के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए विपक्ष की रणनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी पार्टी (SP) को निशाने पर लिया।
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि इन पार्टियों की 'स्वार्थी राजनीति' की वजह से राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण बिल विफल रहा। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि इन दलों ने देश की करोड़ों महिलाओं के सपनों को कुचला है। यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार अब इस लड़ाई को केवल संसदीय नियमों तक सीमित न रखकर इसे जनता के बीच ले जाना चाहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
लोकसभा की कार्यवाही बार-बार क्यों स्थगित हुई?
मुख्य रूप से तीन कारण थे: पहला, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा नेहरू और इंदिरा गांधी पर की गई टिप्पणी। दूसरा, राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर बोलने से रोकना। और तीसरा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पारदर्शिता की कमी को लेकर मनीष तिवारी का स्थगन प्रस्ताव।
प्रधानमंत्री मोदी ने किन विपक्षी दलों की आलोचना की और क्यों?
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, DMK, TMC और सपा की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की स्वार्थी राजनीति के कारण राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण बिल लागू नहीं हो पाया, जिससे महिलाओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद क्या है?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का दावा है कि सरकार ने ऊर्जा, व्यापार और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले बिना पर्याप्त चर्चा और पारदर्शिता के लिए हैं। इसी कारण उन्होंने सदन में तत्काल बयान और चर्चा की मांग की थी।
इस घटना का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, संसद में इस तरह का गंभीर राजनीतिक गतिरोध और टकराव करीब 22 साल बाद देखा गया है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद पूरी तरह टूट गया और सदन कई घंटों तक ठप रहा।